Friday, March 2, 2012


                                    Save Water Pictures With Slogan



A drop of water is worth more than a sack of gold to a thirsty man


Save water, it will save us later!

Don’t let the water run in the sink, our life’s on the brink!

Put a stop to the drop

Dont waste it, just taste it!
When you conserve water, you conserve life!

शौकिया वोट डालने वाला ?

चेहरे पर रोष और झल्लाहट में वो दुकानदार से संभवत काम मांग रहे हैं| उम्र चालीस के करीब होगी लेकिन चेहरे पर उभर आई हड्डियां गरीबी साफ दिखाती हैं| आठवीं पास करने के बाद बिजली मिस्त्री का काम करते थे लेकिन पिछले पांच वर्षों में कई छोटे उद्योग धंधों के बंद होने के कारण उनकी रोज़ी ख़राब हो गई, छोटा आदमी तो मारा गया न |


सड़क, पानी, बिजली से हमको मतलब नहीं. हमारी तो रोज़ी रोटी ही ख़राब कर दी सरकार ने. बहुत मेहनत से काम सीखे  बिजली का. ठीक चल रही थी जिंदगी. फिर सब फैक्ट्रियां बंद होने लगीं. हमारा काम ही रुक गया. भूखे मरने की नौबत आ गई.... आंखों की कोर से आंसू निकलते निकलते रुक जाते हैं |


दिक्कत जो है वो बड़े लोगों को है क्योंकि वो काम नहीं करना चाहते हैं, उन्हें मज़दूर चाहिए काम करने के लिए |गरीबों का खून मीठा लगता है इनको, हम तो अपना काम खुद करते हैं |


ज़िंदगी में पांच साल में तो क्या दस साल में कुछ नहीं बदला | कई मज़ूदर तो रिक्शा चला कर भरण पोषण कर रहे हैं |


वोट तो देते ही हैं लेकिन इसका कुछ होता नहीं है. हम तो शौकिया वोट डालने जाते हैं. तफ़रीह के लिए जाते हैं वोट डालने. हमारी ज़िंदगी में कोई बदलाव थोड़े न होगा ......उनके चेहरे पर मेहनत का पसीना झलकता है और आत्मविश्वास दिखाई पड़ता है |

Sunday, February 26, 2012

वो एक कैदी


यह एक सत्य कथा है ......शायद उसकी जगह कोई भी हो सकता था पर वो था मजीद जो 17 वर्ष का था और एक दिन वो रास्ता भूल कर कसूर से सीमा पार चला गया और भारत के सीमा सुरक्षा बल के हाथ चढ़ गया.जाँचकर्ताओं ने कई दिनों की जाँच के बाद पाया कि मजीद जासूस या आतंकवादी नहीं है तो उन्होंने उसे अवैध रुप से सीमा पार करने के आरोप में जेल भेज दिया गया.मजीद को पंजाब और राजस्थान की चार जेलों में रखा गया और दो बार जज के समक्ष पेश किया गया.
साल 2001 में मजीद को मुशर्रफ़ और वाजपेयी की आगरा में हुई मुलाक़ात के कुछ दिनों बाद मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं के दबाव पर मजीद को रिहा करने का आदेश दिया गया था.लेकिन जुलाई 2010 तक अदालती फ़ैसले पर अमल नहीं हो सका.
आख़िरकार मजीद को जेल से निकाल कर अमृतसर पहुँचाया गया और विभिन्न जेलों से रिहा किए गए दूसरी पाकिस्तानी क़ैदियों के साथ वाघा सीमा पर पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले किया गया.मजीद को उनका भाँजा और छोटी मौसी किराए की गाड़ी में पाक-भारत सीमा पर लेने आए.
मजीद को बताया गया कि उनके पिता का 1994 में और माता का 2004 में निधन हो गया.बड़ी बहन के चार और छोटी के दो बच्चे हैं. यह लोग कसूर से लाहौर आ चुके हैं और कसूर वाला घर बेच दिया गया है.मगर मजीद ये सब कुछ नहीं सुन रहा था, उनका ध्यान कहीं ओर था और वह हर व्यक्ति को आँखे फाड़ फाड़ कर देख रहा था. 31 साल में दुनिया पूरी तरह से बदल चुकी थी.
जैसे ही गाड़ी लाहौर के सज़बाज़ार इलाक़े में पहुंची तो मोटर साइकल पर सवार चार लोगों ने आगे आकर उसे रोकने की कोशिश की.लेकिन गाड़ी के ड्राईवर ने रोकने के बजाए गाड़ी ओर तेज़ कर दी जिस पर मोटर साइकल पर सवार लोग आक्रोश में आ गए और उन्होंने गाड़ी पर सीधी फ़ायरिंग की.ड्राइवर उसी समय मर गया और गाड़ी खंबे से टकरा गई. मजीद, उनकी मौसी और भाँजे को घायल स्थिति में अस्पताल पहुँचाया गया.
अगली सुबह मजीद मर गया.अस्पताल प्रबंधन ने शव मजीद की बड़ी बहन के हवाले करते हुए एक फॉर्म भरने को कहा.
मजीद की बहन ने फॉर्म में लिखा.
नाम: अब्दुल मजीद
जन्म तिथि: 05 नवंबर 1962
मृत्यु तिथि: 29 जुलाई 2010
आयु: 17 


Saturday, February 25, 2012

योजनाओं की सफलता

खाद्य सुरक्षा कानून लगभग 75 प्रतिशत ग्रामीणों और 50 प्रतिशत शहरवासियों को सात किलो खाद्यान्न प्रति माह तीन रुपए प्रति किलो या कम पर उपलब्ध कराया जाएगा।इसका विरोध सिर्फ इस तर्क से किया जा रहा है कि इससे सरकार की वित्तीय स्थिति पर असहनीय बोझ पड़ेगा।खाद्यान्न पर सरकार द्वारा लगभग 60,000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष खर्च किए जा रहे हैं। इस कानून के लागू होने पर खर्च बढ़कर लगभग 125,000 करोड़ रुपये हो जाएगा।


विरोध अनुचित है। लगभग दो करोड़ सरकारी कर्मियों को 500,000 करोड़ रुपये का प्रतिवर्ष वेतन दिया जा रहा है। कर्मी का औसत वेतन 2,50,000 रुपये प्रतिवर्ष है। इसके सामने गरीब परिवारों को दी जाने वाली मात्र 1,500 रुपये प्रतिवर्ष खाद्यान्न सब्सिडी को असहनीय क्यों बताया जा रहा है?
विश्व बैंक द्वारा कराए गए अध्ययन में पाया गया कि केवल 41 प्रतिशत खाद्यान्न ही लाभार्थियों तक पहुंचा है। मान लीजिए सरकार ने 10 किलो गेहूं 15 रुपये प्रति किलो में खरीदा और पांच रुपये प्रति किलो फूड कार्पोरेशन का खर्च हुआ। सरकार को कुल 200 रुपये खर्च करने पड़े। इस 10 किलो में 30 प्रतिशत यानि तीन किलो गरीब को मिला। बाजार से खरीदने पर गरीब को 45 रुपये देने होते, राशन दुकान से उसे यह नौ रुपये में उपलब्ध हो गया। यानी 36 रुपये की राहत गरीब तक पहुंचाने में सरकार को 200 रुपये खर्च करने पड़े। 


इस कानून में कुछ खामियां जरूर हैं, जिन्हें दूर किया जाना चाहिए। पहली समस्या लाभार्थी के चयन की है।दूसरी समस्या नगद के दुरुपयोग की है।रोजगार गारंटी योजना भी नगद ट्रांसफर की ही है। इसमें काम का दिखावा किया जाता है। जननी सुरक्षा योजना में गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में प्रसव पर और धनलक्ष्मी योजना में जन्म के पंजीकरण, टीकाकरण और बच्चे के स्कूल में जाने पर नगद पुरस्कार दिया जा रहा है। इन योजनाओं की सफलता के परिणाम उपलब्ध हैं। यदि गरीब द्वारा नगद का दुरुपयोग होता तो इन योजनाओं के दुष्परिणाम सामने आए होते।

Friday, February 24, 2012

मास्टर ब्लास्टर और दोहरा शतक

दो  साल पूर्व आज ही के दिन  24 फरवरी २०१० को हमारे  भारतीय खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर ने ग्वालियर में इतिहास रचते हुए वनडे क्रिकेट की दुनिया का पहला दोहरा शतक बनाया था .दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले जा रहे इस मैच में तेंदुलकर ने 147 गेंदों का सामना किया और 25 चौके और तीन छक्के लगाए.इसके साथ ही उन्होंने लगभग 13 साल पुराना एक रिकॉर्ड भी तोड़ा और वो था वनडे के सर्वोच्च स्कोर का. पहले यह पाकिस्तान के सईद अनवर (194 रन) के नाम था.




                        


दक्षिण अप्रीका के खिलाफ भारत ने टॉस जीता था और सहवाग के साथ सचिन ने उस दिन पारी की शुरुआत की थी. खेल के अंत तक तेंदुलकर दो सौ रन बनाकर नाट आउट रहे.


पत्रकारों से बातचीत में सचिन तेंदुलकर ने कहा था कि रिकॉर्ड तो टूटने के लिए ही बनते हैं. सचिन ने कहा कि वो अपनी क्रिकेट का पूरा आनंद उठा रहे हैं और उन्हें खुशी है कि उनकी पारी से टीम ने बड़ी जीत दर्ज की.


क्रिकेट की दुनिया में फिर एक बार भारत का नाम स्वर्णिम हुआ फिर दुनिया ने मास्टर ब्लास्टर सचिन और भारत का लोहा माना या यू कहे की सचिन ने अपना लोहा मनवाया !

Wednesday, February 22, 2012

नो पॉलिटिक्स प्लीज ख़ैर....

प्रतिभावान हैं, आधुनिक हैं, सब चीज़ें जानने की कोशिश करते हैं, सोशल नेटवर्किंग के दौर का प्रतिनिधित्व करते हैं लेकिन अभी भी राजनीति पर बात करने से कतराते हैं.बात कर टका सा जवाब मिला- नो पॉलिटिक्स प्लीज.
कुछ देर बाद एक गुट राज़ी हुआ.बातचीत में राजनीति को लेकर उनकी उलझन सामने आ गई.समय नहीं है. पढ़ाई का दबाव होता है....इत्यादि, इत्यादि. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि वे देश-दुनिया से बेख़बर हैं.


"व्यस्तता के बावजूद कुछ समय निकल ही जाता है. अख़बार पढ़ लेते हैं. इंटरनेट पर देख लेते हैं. क्या चल रहा है, कौन सी पार्टी क्या प्रचार कर रही है, किसका क्या एजेंडा है." युवा नेताओं की बात आई तो अखिलेश को राहुल से ऊपर रखा. सर्वेंद्र कहते हैं कि राहुल को अभी ज़मीनी सच्चाई का आभास नहीं है.छात्र उन पार्टियों से नाराज़ हैं, जो लोकतंत्र की बात तो करती हैं, लेकिन उनकी पार्टी में ही लोकतंत्र नहीं है राजनीति में उन लोगों के लिए विकास के अवसर नहीं हैं, जो निचले स्तर पर काम करते हैं. उनकी ये दुविधा कई युवा की दुविधा है, जो राजनीति में प्रगति के कम अवसर को देखते हुए उसमें पड़ना ही नहीं चाहते.


"छात्रों को भी प्रॉक्सी वोटिंग का अधिकार मिलना चाहिए, जो पढ़ाई के कारण अपने-अपने शहरों से दूर हैं. अब कानपुर वो पुराना कानपुर नहीं, जिसे मैनचेस्टर ऑफ़ ईस्ट कहा जाता था. यहाँ उद्योग का काफ़ी नुकसान हुआ है और इसके लिए मैं राजनेताओं को ज़िम्मेदार मानता हूँ अभी काफ़ी लंबा सफ़र तय करना पड़ेगा, उन्नति और प्रगति के लिए." 


............आईआईटी कानपुर के छात्र देश चुनाव पर !!!



Monday, February 20, 2012

महाशिवरात्रि

                                                 Maha Shivaratri
Maha Shivratri is a Hindu festival celebrated every year in reverence of Lord Shiva. Alternate common names/spellings include Maha SivaratriShivaratriSivarathri, and Shivaratra. Shivaratri literally means the great night of Shiva or the night of Shiva. It is celebrated every year on the 13th night/14th day of the Maagha or Phalguna month of the Hindu calendar.


Lord Shiva was married to Devi Parvati on Shivratri. Remember Shiva minus Parvati is pure 'Nirgun Brahman'. With his illusive power, (Maya, Parvati) He becomes the "Sagun Brahman" for the purpose of the pious devotion of his devotees.It is also believed that on Shivratri, Lord Shiva became 'Neelkantham' or the blue-throated by swallowing the deadly poison that came up during the churning of "Kshir Sagar" or the milky ocean. The poison was so deadly that even a drop in His stomach, which represents the universe, would have annihilated the entire world. Hence, He held it in His neck, which turned blue due to the effect of poison. Shivratri is therefore also a day of thanksgiving to the Lord for protecting us from annihilation.


The festival is principally celebrated by offerings of Bael or Bilva/Vilvam leaves to Lord Shiva, all day fasting and an all night long vigil. From the very early morning, Shiva temples are flocked by devotees, mostly women, who come to perform the traditional Shivalinga worship and hence hope for favours from the god. Devotees bathe at sunrise, preferably in the Ganga, or any other holy water source (like the Shiva Sagartank at Khajurao). This is a purificatory rite, an important part of all Hindu festivals. Wearing a clean piece of clothing after the holy bath, worshippers carry pots of water to the temple to bathe the Shivalinga. They offer prayers to the sun, Vishnu and Shiva.Women pray for the well-being of their husbands and sons. An unmarried woman prays for a husband like Shiva, who is considered to be the ideal husband. The temple reverberates with the sound of bells and shouts of “Shankerji ki Jai” or 'Hail Shiva'. Devotees circumambulate the linga, three or seven times, and then pour water over it. Some also pour milk.