Sunday, April 8, 2012

महान ?

महान क्या होता है और भारत है क्या महान ? जैसे मुँह पर ताले पड़ गए थे.. 


आप सबने भी पढ़ी होगी वो ख़बर- एक बार फिर कम उम्र की घरेलू नौकरानी के साथ डाक्टर दंपति का दुर्व्यवहार, प्रताड़ना...ख़बर में उस लड़की के हवाले से लिखा था कि उसे भर पेट खाना नहीं दिया जाता था चिकोटी काटी जाती थी और उसकी चीख बाहर न पहुँचे इसके लिए मुँह को कपड़े से ठूँस कर बंद किया जाता था..


"ऐसी घटनाएँ तो छपती ही रहती हैं.. एनजीओ ने बढ़ा-चढ़ा कर रिपोर्ट लिखवाई होगी.. नौकरानियों का तो यही हाल है जिस थाली में खाओ उसी में छेद करो"...


थोडा बुखार होता रहता था.. फिर ठीक हो जाता था. कभी डाक्टर के पास नहीं गई ? एक साल में कभी नहीं !
इलाज शुरू होने के तुरंत बाद ही वो स्वस्थ होने लगी.. खुश भी रहती थी 


और............


 फिर एक दिन वो भाग गई.. एक पहचान के लड़के के साथ ...फिर लौट  आई दो दिनो बाद.. लड़का शादी-शुदा परिवार वाला था..


उसे लेने एजेंट आया और उससे पहले कि मैं उसे रोक.. कस कर उसे तमाचा मारा. मैंने पूछा एजेंट के साथ जाओगी..
मन तो नही है.. वो मुझसे ज़बरदस्ती करता है..कई बार मना करती हूं फिर भी..
कहता है जीजा साली का रिश्ता है, छेडूंगा..


चुपचाप मेरी तरफ देखने लगी.....कातर दृष्टि से....




मुझे पता था वो जानना चाहती थी कि क्या वो मेरे पास काम करती रह सकती है?
मुझे मेरे परिवार  की सुरक्षा याद आई, मेरे पीछे बिल्कुल सुनसान  घर फिर किसी का आना जाना शुरू कर दिया इसने तो... लड़की का मामला है किसी बड़ी मुसीबत मे ना पड़ जाउं..
उसे मेरी खामोशी से मेरे जवाब का अंदाज़ा हो गया होगा..
दुल्हन की तरह सजी झट उठ कर बोली, एजेंट के साथ जाउंगी...जनवरी की ठंडी और गहरी रात में गुम होती चली गई .. केवल उसके दुपट्टे का गोटा दूर तक झिलमिलाता रहा..
और मुझे याद आई कुलीनता .. हिंसा वाली पंक्ति....  ये कहने में शर्म सी महसूस हुई कि भारत सबसे महान है !!!!




Saturday, April 7, 2012

क्रांतिकारी कवि केसरी सिंह बारहठ

                        
सूरमाओं, सतियों,और संतों की भूमि राजस्थान में क्रांतिकारी कवि   केसरी सिंह बारहठ का जन्म २१ नवम्बर १८७२को शाहपुरा मेवाड़ के देवपुरा मे हुआ एक माह की आयु में ही उनकी माता का निधन हो गया, अतः
 उनका लालन-पालन उनकी दादी-माँ ने किया | उनकी शिक्षा उदयपुर

में हुई |उन्होंने बांगला,मराठी,गुजराती आदि भाषाओँ के साथ इतिहास, दर्शन (भारतीय और यूरोपीय) मनोविज्ञान,खगोलशास्त्र,ज्योतिष का अध्ययन कर प्रमाणिक विद्वत्ता हासिल की | डिंगल-पिंगल भाषा की काव्य-सर्जना तो उनके जन्मजात चारण-संस्कारों में शामिल थी ही,बनारस से श्री गोपीनाथ जी नाम के पंडित को बुला कर इन्हें संस्कृत की शिक्षा भी दिलवाई गई|

केसरी सिंह बारहठ में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी थी।अंग्रेजी हुकूमत उन्हें बिलकुल नहीं सुहाती थी। सन् 1891 में वे महाराणा फतह सिंह की सेवा में आये तभी से उन्होंने देखा कि पोलिटिकल एजेन्ट कर्नल माइल्स का मेवाड के राजकार्य में हस्तक्षेप निरन्तर बढता जा रहा था। ऐसे समय में केसरी सिंह बारहठ ने राजपूताना के क्षत्र्यि नरेशों व जागीरदारों को जो अपने को स्वतंत्र्ता का प्रहरी और मायड भूमि के रक्षक समझते थे तथा ऐशो आराम एवं भोग विलास में डूबे हुए थे, नींद से जगाने और कर्त्तव्य बोध का कार्य किया।केसरी सिंह जी ने समाज खास कर क्षत्रिय जाति को अशिक्षा के अंधकार से निकालने हेतु कई नई-नई योजनाएं बनाई ताकि राजस्थान भी शिक्षा के क्षेत्र में दूसरे प्रान्तों की बराबरी कर सके | उस समय राजस्थान के अजमेर के मेयो कालेज में राजाओं और राजकुमारों के लिए अंग्रेजों ने ऐसी शिक्षा प्रणाली लागू कर रखी थी जिस में ढल कर वे अपनी प्रजा और देश से कट कर अलग-थलग पड़ जाएँ | इसीलिये सन १९०४ में नेशनल कालेज कलकत्ता की तरह, जिसके प्रिंसिपल अरविन्द घोष थे, अजमेर में 'क्षत्रिय कालेज' स्थापित करने की योजना बनाई, जिस में राष्ट्रीय -भावना की शिक्षा भी दी जा सके | इस योजना में उनके साथ राजस्थान के कई प्रमुख बुद्धिजीवी साथ थे | इससे भी महत्वपूर्ण योजना राजस्थान के होनहार विद्यार्थियों को सस्ती तकनीकी शिक्षा के लिए सन १९०७-०८ में जापान भेजने की बनाई। क्यों कि उस सदी में जापान ही एकमात्र ऐसा देश था, जो रूस और यूरोपीय शक्तियों को टक्कर दे सकता था 


सन १९०३ में वायसराय लार्ड कर्जन द्वारा आहूत दिल्ली दरबार में शामिल होने से रोकने के लिए उन्होंने उदयपुर के महाराणा फतह सिंह को संबोधित करते हुए " चेतावनी रा चुंगटिया " नामक सोरठे लिखे, जो उनकी अंग्रेजों के विरूद्ध भावना की स्पष्ट अभिव्यक्ति थी | सशस्त्र क्रांति की तैयारी के लिएप्रथम विश्वयुद्ध (१९१४) के प्रारम्भ में ही वे इस कार्य में जुट गए; अपने दो रिवाल्वर क्रांतिकारियों को दिए और कारतूसों का एक पार्सल बनारस के क्रांतिकारियों को भेजा व रियासती और ब्रिटिश सेना के सैनिकों से संपर्क किया | एक गोपनीय रिपोर्ट में अंग्रेजसरकार ने कहा कि केसरी सिंह राजपूतरेजिमेंट से संपर्क करना चाह रहा था | उनका संपर्क बंगाल के विप्लव-दल से भी था और वे महर्षि श्री अरविन्द से बहुत पहले १९०३ में ही मिल चुके थे।केसरी सिंह पर ब्रिटिश सरकार ने प्यारेलाल नाम के एक साधु की हत्या और अंग्रेज हकूमत के खिलाफ बगावत व केन्द्रीय सरकार का तख्तापलट व ब्रिटिश सैनिकों की स्वामिभक्ति खंडित करने के षड़यंत्र रचने का संगीन आरोप लगा कर मुकदमा चलाया गया | इसकी जाँच के लिए मि. आर्मस्ट्रांग आई.पी.आई.जी., इंदौर को सौंपी गई, जिसने २ मार्च १९१४ को शाहपुरा पहुँच शाहपुरा के राजा नाहर सिंह के सहयोग से केसरी सिंह को गिरफ्तार कर लिया | इस मुकदमे में स्पेशल जज ने केसरी सिंह को २० वर्ष की सख्त आजन्म कैद की सजा सुनाई और राजस्थान से दूर हजारी बाग़ केन्द्रीय जेल बिहार भेज दिया गया | जेल में उन्हें पहले चक्की पीसने का कार्य सौपा गया जहाँ वे दाल व अनाज के दानों से क ख ग आदि अक्षर बना कर अनपढ़ कैदियों को अक्षर-ज्ञान देते और अनाज के दानों से ही जमीन पर भारत का नक्शा बना कर कैदियों को देश के प्रान्तों का ज्ञान भी कराते थे | केसरी सिंह का नाम उस समय कितना प्रसिद्ध था उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उस समय श्रेष्ठ नेता लोकमान्य तिलक ने अमृतसर कांग्रेस अधिवेशन में केसरी सिंह को जेल से छुडाने का प्रस्ताव पेश किया था|

हजारी बाग़ जेल से छूटने के बाद अप्रेल १९२० में केसरी सिंह ने राजपुताना के एजेंट गवर्नर जनरल (आबू ) को एक बहुत सारगर्भित पत्र लिखा जिस में राजस्थान और भारत की रियासतों में उतरदायी शासन-पद्धति कायम करने के लिए सूत्र रूप से एक योजना पेश की | इसमें “राजस्थान महासभा” के गठन का सुझाव था जिस में दो सदन (प्रथम) भूस्वामी प्रतिनिधि मंडल (जिस में छोटे बड़े उमराव,जागीरदार) और “द्वितीय सदन” सार्वजनिक प्रतिनिधि परिषद् (जिसमें श्रमजीवी,कृषक,व्यापारी ) रखने का प्रस्ताव था |


सन १९२०-२१ में सेठ जमनालाल बजाज द्वारा आमंत्रित करने पर केसरी सिंह जी सपरिवार वर्धा चले गए, जहाँ विजय सिंह ‘पथिक’ जैसे जनसेवक पहले से ही मौजूद थे | वर्धा में उनके नाम से ” राजस्थान केसरी ” साप्ताहिक शुरू किया गया, जिसके संपादक विजय सिंह ‘पथिक’ थे | वर्धा में ही केसरी सिंह का महात्मा गाँधी से घनिष्ठ संपर्क हुआ | उनके मित्रों में डा. भगवानदास (पहले ‘भारतरत्न’), राजर्षि बाबू पुरुषोत्तम दास टंडन,गणेश शंकर ‘विद्यार्थी’, चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’, माखनलाल चतुर्वेदी राव गोपाल सिंह खरवा, अर्जुनलाल सेठी जैसे स्वतंत्रता के पुजारी शामिल थे | देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ होम कर देने वाले क्रान्तिकारी कवि केसरी सिंह ने १४ अगस्त १९४१ को ” हरी ॐ तत् सत् ” के उच्चारण के साथ अंतिम साँस ली |
प्रताप सिंह बारहठ भी अपने पिता केसरी सिंह बारहठ के नक़्शे कदम पर चलते हुए क्रन्तिकारी बन गए. आपका जन्म २५ मई १८९३ को शाहपुरा में हुआ. आप रास बिहारी बोस के संपर्क में आये और अपना सर्वस्व मत्री भूमि के सेवा में अर्पित कर दिया.आपके चाचा जोरावर सिंह बारहठ पहले से ही इस ग्रुप में शामिल थे. ३ दिसम्बर १९१२ को लोर्ड हार्डिंग भारत के तत्कालीन विसरॉय पर बम डालने वालों में आप शामिल थे. बनारस केस में आपको ५ वर्ष सश्रम जेल की सजा हुई. आप पर इतने जुल्म किये गए की आपका जेल में हे ७ मई १९१७ को स्वर्गवास हो गया.

Sunday, April 1, 2012

प्रकाश

यह सर्वविदित है की भगवद गीता में श्री कृष्ण ने कर्म को भक्ति के सामान महत्वपूर्ण दर्शाया है | यू तोसभीप्राणीइस क्षणभंगुर और नाशवान संसार में जन्म लेते है जीते है और मृत्यु को प्राप्त होते है |परन्तु उन्ही का जीना और मरना सार्थक है जो देश जाती धर्म के लिए लेश मात्र का भी  योगदान देते है और अपने पीछे ऐसी वास्तु छोड़ जाते है जो मानव कर्त्तव्य को बतलाती हो और उसे ठीक तरह से सँभालने और समझने में सहायता करती हो |सैनिक अपना रक्त देने का प्रण दे केर देश और समाज की रक्षा कर संसार रूपी वृक्ष की जड़े सीच जाते है ,परन्तु कुछ ऐसे भी महापुरुष है जो अपने आदर्श चरित्र के उपहार से देश की नीव को सुद्रढ़ और स्थाही बनाते है |ऋषि मुनियों की पवन धरा पर प्रेरणा की किरने दिव्य मानियो से सदेव अबुझ रहेगी और मानवता का पथप्रशस्त करती रहेगी |

भारतीय मनीषियों के उर्वर मस्तिष्क से जिस कर्म, ज्ञान और भक्तिमय त्रिपथगा का प्रवाह उद्भूत हुआ, उसने दूर-दूर के मानवों के आध्यात्मिक कल्मष को धोकर उन्हेंने पवित्र, नित्य-शुद्ध-बुद्ध और सदा स्वच्छ बनाकर मानवता के विकास में योगदान दिया है। दर्शन द्वारा विषयों को हम संक्षेप में दो वर्गों में रख सकते हैं। लौकिक और अलौकिक अथवा भौतिक और आध्यात्मिक। दर्शन या तो विस्तृत सृष्टि प्रपंच के विषय में सिद्धान्त या आत्मा के विषय में हमसे चर्चा करता है। इस प्रकार दर्शन के विषय जड़ और चेतन दोनों ही हैं।वेदों के मंत्र प्राचीन भारतीयों के संगीतमय लोककाव्य के उत्तम उदाहरण हैं।प्राचीन काल में राजा लोग अपनी राजनीति में उस वक्त के ऋषि-मुनियों से विचार-विमर्ष करते थे. इसी लिए वर्तमान समय में इस समस्या के समाधान के लिए किसी महापुरुष के साथ विचार-विमर्ष करना चाहिए जो धर्म, राजनीति के मन्तव्यों को जानता हो. यदि उन्हें जीवित महापुरुष न मिले तो बीते संतों महात्माओं के साहित्य द्वारा समस्या का समाधान करना चाहिए|




Wednesday, March 28, 2012

Irrfan Khan :Gem of Jaipur glittering worldwide


                        

His portrayal of the army man-turned-steeplechase runner-turned bandit in Paan Singh Tomar has achieved both critical appreciation and commercial success. In July, he plays Spiderman’s nemesis, the villainous Proto Goblin in The Amazing Spiderman. Come Christmas, he’ll slip into the shoes of the Older Pi in Ang Lee’s Life of Pi. Between all these, he manages to squeeze in a film like Thank You. British director Danny Boyle calls him “a touchstone connecting two worlds”. Diversity is clearly actor Irrfan’s forte, it looks like Irrfan  is also making his presence felt in the international circuit.
                                            Irfan Khan                            Irfan Khan 2
In a land of me-too actors, big stars and bigger vanity vans, Irrfan stands out with his raw talent, engaging screen presence and his ability to choose meaningful roles.One actor who has proved himself again and again, Famous Hollywood actress like Anjelina Jolie are on buddy terms with this actor Really very strong directors are starting to take notice of this star, who comes from a land that some view as exotic and far away . But you realize with actors like Irrfan, how close they really are ?

Whenever he plays a role,its not Irrfan any longer but the role he is playing.Indeed it’s a delight to have such a versatile actor in Indian Cinema.He is the mega star actor who takes India to the World Cinema stage.Overacting ,which is the domain of all Bollywood stars is absolutely absent in Irrfan Khan.Irrfan Khan is one actor who will take the legacy of Moti Lal,Balraj Sahni,Om puri,Nasruudin Shah to a new dimension.Irrfan Khan makes him completely different actor is that his own natural way of exhibiting his style off-screen and on screen, he never hesitate to voice his opinion .He is a gifted talented artist .Best of luck to this Rajasthan's gem.

Tuesday, March 27, 2012

Global Warming And Us

In recent decades, global warming is an apparent phenomenon that brings about floods, droughts, and tsunami. This phenomenon is caused by the abundant release of carbon dioxide into the atmosphere. If this amount of carbon dioxide continues to grow than about  six degrees increase on average per year around the globe in temperature, then Earth will be a harsh place to inhabit for people.


Currently, Earth is on the brink of reaching two degrees increase in climate change. Two degrees increase is a turning point, where ice from the Arctic will begin to melt. Droughts and fires will occur in the Amazon rain forest, a valuable asset of our planet that produces twenty percent of Earth’s oxygen. As the climate increases to three and four degrees, glacier from the Himalayas Mountain will recede, deadly hurricanes will occur more often, and rivers will dry up. When the increase reaches five and six degree, we are approaching doom day.At this point, cities will be flooded and our social systems will collapse.


Signs of global warming are noticeable all over the world; the decaying of the coral reef in Australia is a vivid example of global warming.Global warming is an effect that we are responsible for creating. In order to protect the future of our planet we should take part in controlling and resolving this issue. Governments and civilians should collaborate to reduce the number of power plants and devise more efficient energy sources. Although, we are working on creative idea such taking advantage of energy , but the most practical solution is to be aware of the amount energy that we waste and reduce the amount of carbon dioxide that we release.




Monday, March 26, 2012

What a shame

Recently while surfing I read an article about a village lady the story had been hounding me since.It was titled 'Age no bar to Independence : Karupayee .It was a story about a 101 year old  granny who was a NREGS worker from Madurai district.Her eldest son is 80 yrs of age .

Hats off to her across the nation there will be very less who could make to this age and still work .This might be a matter of great pride for the lady but isn't it shameful that the society is letting her work what about the youth and what a plight in the same country we see growing beggars in their teens !

We should take pledge to save her and others like her in our society at least now.She should have got food and amenities without toiling in the sun.Is it that expensive a deal ,probably one night at a bar with friends will cost much more than her supplies for a month .

We should give a thought at least !

Sunday, March 25, 2012

Tolerate

"People have a tendency to accept" ,we hear the sentence a lot of time .But have we ever thought from where we got this thing tolerance .Why now a days it is getting tougher for people to tolerate ?


The ability to live with or to bear or put up with is the right meaning .  Is it the freedom which is wrongly interpreted and thus tolerating is taken as intruding one's freedom .Look at all the great people across the world from Lincoln ,Martin Luther to our own Gandhi Ji and we can understand tolerance .Now a days in business too we tolerate risk and sometimes tolerate losses made by near and dear ones with our hard earned money or other important things  .


Tolerance is not seen as a grant of freedom ,to tolerate other persons behaviour is seen as a mild form of disapproval .They mean letting the other person do what ever he want to here he might hurt you but you don't have to retaliate and that is your tolerance .India is a tolerant nation where as America isn't .In long run tolerance pays Parents should teach there child to tolerate .tolerance can make the world run smoothly .