Friday, October 21, 2011

अंधेर नगरी चौपट राज .........राम राज्य आपायेगा

सुना है अगले  हफ्ते दीवाली है !अपने देश का सबसे बड़ा दीपो का त्यौहार जिसमे लोग घर को साफ़ सुथरा कर के रौशनी से सजाते है | क्योकि इसी दिन श्री राम १४ वर्ष का वनवास समाप्त कर अयोध्या पर राज करने पधारे ... की ख़ुशी का इज़हार और सुयोग्य राजा के राज की ख़ुशी हेतु घी के दिए जलाये |

रौशनी के त्यौहार पर आज पूरे राज्य को चिंता है की क्या दीवाली के दिन पूरे चौबीस घंटे बिजली आएगी ?क्या कोई यह सुनिश्चित कर पायेगा की मिठाइयो में मिलावट नहीं होगी ? 

पटाखों से निकलने वाली ज़हरीली गैस से नुक्सान न हो इसका तो उपाय होगया होगा पर भोपाल गैस के ज़हर का इलाज आज भी नहीं होपाया 

आज क्या हमे सुयोग्य शाषक मिलेगा ?क्या हमारे रास्ते के खड्डे भरके ओमपुरी के गालो जैसी सड़क सही होपाएगी ?

 क्या दाल अनाज नमक घी तेल आम इंसान की पहुच में आपयेगा ?महंगे नमक मिर्च आज गरीब को सूखी रोटी और नमक भी नसीब नहीं होने दे रही | 

जो बटोर सकता है वो माल बटोर कर ठाट से बैठा है और बाकि आपस मे राजनेता को कौस कर अपनी खीज निकाल रहा है |दीवाली मे चार की जगह दो पटाखे छोड़ ,दो किलो की जगह आधा किलो और वो भी मिलावटी मिठाई ला कर सिस्टम को कोस कर सो जायेंगे और दुसरे दिन फिर गृहस्थी की गाड़ी मे कोल्हू के बैल की तरह जुट जायेंगे | कोई झकझोर कर जगाना भी चाहे तो उठ कर दो तिन कदम उसके साथ चल कर फिर आखो पर पट्टी बांध कर कोल्हू के बैल बेन जाना ही सबसे सरल और आसन जीवन शैली लगती है हमें सो फिर अपने "कम्फर्ट ज़ोन " में चले जाते है |

 वैसे हमारे लिए यही सही है अंधेर नगरी चौपट राज .............और इस तरह राम राज्य कभी नहीं आपायेगा  ?


Wednesday, October 19, 2011

दान धारणा

बड़े दिनों बाद अखबार मे आज एक खबर ने मुझे सोचने पर  मजबूर कर दिया |खबर यह थी की कुछ अंग्रेजो ने एक  रेली का आयोजन किया जहा ऑटोरिक्शा मे बैठ कर भ्रमण  करना और यात्रा के दौरान  रास्ते मे कुछ पैसे कमाना  और फिर उन पैसो (७४०००रु ) और ऑटोरिक्शा को जरुरत मंदों को दान कर देना |

कुछ दिनों पूर्व राजस्थान मे कुछ १०० -२००  अँगरेज़ साइकिल रेली करते हुए दिल्ली से जोधपुर होते हुए उदैपुर के नज़दीक गोगुन्दा गाव मे पहुचे और वहा वे साइकिले गाववालो को दे वहा स्कूल की ईमारत के लिए दस लाख रूपये दान दे गए |

उपरोक्त दोनों उध्राहरण मे देने वालो ने किसी प्रकार का कोई प्रचार नहीं किया |दोनों मे कही भी धार्मिक भाव भी नहीं थे |किसी भी प्रकार का प्रचार का भी अभाव था | हम भारतीय भी संस्था  दान मे है जैसे अजीम प्रेमजी आदि | भारत मे लाखो लोग मंदिरों मस्जिदों मे दान कर देगे पर भूखो नंगो को गाड़ी के करीब आता देख शीशे चढ़ा लेते है |यदि कोई समाज मे दान करता है तो उसे मंदिर बनाना ,ब्राह्मणों को भोजन करना ,आदि का चलन ज्यादा है क्योकि शुरू से ही यह देखा गया है की दान भी वाही करो जहा से फल ज्यादा से ज्यादा मिले चाहे पितरो को मिली या बरकत के रूप मे हमें | इस धारणा को बदलने मे वक़्त लगेगा |इसी कारण मंदिरों की भव्यता और विकास कार्यो की निम्नता हमारे देश मे देखि जा सकती है |



Tuesday, October 18, 2011

Common girl transformed into Queen !

During the Buddhist ritual the king, who is 31, came down from his throne to place a crown upon the head of 21-year-old student Jetsun Pema.Monks chanted to celebrate the union as the king returned to his seat and Ms Pema took the throne as the new queen.Wherever he goes he holds her hand. Now young people are starting to copy.The whole theme of the wedding was to keep it a simple family affair, that is the Bhutanese family.


Although polygamy is legal in Bhutan, the king is not expected to follow his father's example and take more wives.The kingdom is also well-known for its "Gross National Happiness" index - an alternative to GDP - which measures personal happiness as opposed to economic growth.


So are Bhutan's 630,000 people ready for democracy?


There are already elections at the local level, and the king and Crown Prince have been touring the country to prepare their people for the change.The people of this tiny kingdom, perched high in the Himalayas between India and Tibet, hope they can have the best of both worlds: retaining their Buddhist traditions but adopting modern technology - and democracy - at the same time.
They know it is a bold experiment - and they know there's a risk it could fail.

Monday, October 17, 2011

ढाई अक्षर प्रेम का

 प्रथम श्रेणी के भक्तो की महिमा उनके अथक परिश्रम और अव्यय धेर्य में है और कबीर की महिमा उत्कट साहस में |उन्होंने सफ़ेद कागज़ पर लिखना शरू किया था |वह उस पांडित्य को बेकार समझते थे जो केवल ज्ञान का बोझ ढोना सिखाता है |जो मनुष्य को जड़ बनादेता और भगवान के प्रेम से वंचित करता है |

पढ़ी पढ़ी के पत्थर भया,लिखी लिखी भया जू इंट |
कहे कबीरा प्रेम की ,लगी न एको छिट ||
पोथी पढ़ी पढ़ी जग मुआ ,पंडित भया न कोय |
ढाई अक्षर प्रेम का ,पढ़े सो पंडित होई ||

यह प्रेम ही सुब कुछ है | वेद नहीं ,शास्त्र नहीं ,कुरान नहीं ,जप नहीं ,माला नहीं ,तस्बीह नहीं ,मंदिर नहीं ,मस्जिद नहीं ,अवतार नहीं ,नबी नहीं ,पीर नहीं ,पैगम्बर नहीं ,यह प्रेम समस्त ब्रहामचारो की पहुच के बहुत उपर है |समस्त संस्कारो के प्रतिपाध से कही श्रेष्ठ है |जो कुछ भी इसके रास्ते मे खड़ा होता है वह हेय है |
उन्होंने समस्त व्रतों,उपवासों और तीर्थो को एकसाथ अस्वीकार कर दिया |उन्होंने एक निर्जन निरंजन निर्लेप के प्रति लगन को ही अपना लक्ष्य घोषित किया |इस लगन या प्रेम का साधन यह प्रेम ही है और कोई भी मध्यवर्ती साधन उन्होंने स्वीकार नहीं किया |

प्रेम ही साधन है, प्रेम ही साध्य -व्रत भी नहीं ,मुहर्रम भी नहीं ,पूजा भी नहीं ,नमाज भी नहीं ,हज भी नहीं तीर्थ भी नहीं, देव नहीं ,द्विज एकादशी नहीं, दीवाली नहीं सब गलत है | कबीर कहते है भला हिन्दुओ के भगवान तो मंदिर में रहते है और मुसलमानों के खुदा मस्जिद में ,पर जहा मंदिर न हो और मस्जिद भी न हो वहा किसकी ठकुराई काम कर रही है ?कबीर ने उन सब लोगो को अस्वीकार कर दिया जो आख मूँद कर चलना पसंद करते है |
कबीर कहते है :ओ फकीर ,तू अपनी राह चल न मंदिर जा न मस्जिद जा काहे टंटे में पड़ता है |तेरे राम ,रहीम ,श्याम करीम में कोई भेद नहीं है सुब एक है ......

Sunday, October 16, 2011

इश्क का मतवाला : फक्कड़

वह सर से पाँव तक मस्त मौला थे | मस्त -जो पुराने कृत्यों का हिसाब नहीं रखते ,वर्तमान कर्मो को सर्वस्व नहीं समझते और भविष्य मे सब कुछ झाड़ फटकार कर निकल जाते है |जो दूकानदार किये कराय का लेखा जोखा दुरुस्त रखता है वह मस्त नहीं हो सकता |जो अतीत का चिटठा खोले रहता है वह भविष्य का क्रांतदर्शी नहीं बन सकता |

हमन है इश्क मस्ताना ,हमन को होश्यारी क्या 
रहे आज़ाद या जग से ,हमन दुनिया से यारी क्या 
जो बिछुड़े है पियारे से ,भटकते दर बदर फिरते 
हमारा यार है हममे ,हमन को इंतजारी क्या 
खलक सब नाम अपने को ,बहुत कर सर पटकता है 
हमन गुरुनाम सच्चा है ,हमन दुनिया से यारी क्या 
न पल बिछुड़े पिया हमसे ,न हम बिछुड़े पियारे से 
उन्ही से नेह लगी है ,हमन को बेकरारी क्या 
कबीरा इश्क का माता ,दुई को दूर कर दिल से 
जो चलना राह नाज़ुक है ,हमन सर बोझ भारी क्यों ||

कबीर यहाँ कहते है की जो इश्क का मतवाला है वह दुनिया के माप जोख से अपनी सफलता का हिसाब नहीं करता | कबीर जैसे फक्कड़ को दुनिया की होश्यारी से क्या वास्ता ? वह प्रेम के मतवाले थे मगर अपनेको उन दीवानों में नहीं गिनते थे जो माशूक के लिए सर पर कफ़न बांधे फिरते ,जो बेकरारी की तड़पन में इश्क का चरम फल पाने का भान करते है ,क्योकि बेकरारी उस वियोग में होती है जिसमे प्रिय दूर हो - उसे पाना कठिन हो | पर जहा प्यारे से एक क्षण के लिए भी बिछोह नहीं ,वहा तदपन कैसी ?जो गगरी भारी है उसमे छलकन  कहा ?जहा द्वेष भाव मिट गया हो उस अजीब मस्ती में बैचनी कहा ?
इसीलिए फक्कड़राम किसी के धोखे में आने वाले नहीं थे | दिल जम गया तो ठीक है और नहीं जमा तो राम राम कर के आगे चल दिए | योग प्रक्रिया को उन्होंने डट कर अनुभव किया ,पर जची नहीं | उन नक्टो के समान चुप्पी साधना उन्हें मालूम न था जिन्होंने इस आशा पर नाक कटा ली थी की इस बाधा के दूर होते ही स्वर्ग दिखाई देने लगता है | उन्हें यह परवाह न थी की लोग उनकी असफलता पर क्या क्या टिपण्णी करंगे |कबीर ने बिना लग लपेट के,बिना झिजक के एलान किया :

आसमान का आसरा छोड़ प्यारे ,
उलटी देख घट अपना जी |
तुम आपमें आप तहकीक करो ,
तुम छोड़ो मन की कल्पना जी |

Saturday, October 15, 2011

Dilemma : Political

After much drama through out the day Mr. Yeddyurappa surrendered at around 3;45pm at Lokayukt court and sent to judicial custody till monday .This is the same man who three months back in july walked in rain along with many of his ministers to submit his resignation as chief minister of the Karnataka state.



Former Lokayukta Santosh Hegde yesterday hit at the state government terming its decision to send his report on illegal mining back to the lokayukta for clarifications as frivolous.Hegde pointed out that the State, while referring the case to the ombudsman, had directed to inquire into the affairs of Mysore Minerals Limited and its commercial activities “to fix responsibility and initiate criminal and civil action, to look into direct or indirect political interference.”He accused the government of adopting double standards as it was trying to evade prosecution of former chief minister B S Yeddyurappa.


October 15 was a "bad day" for the party as its former chief minister Yeddyurappa was arrested in graft cases but asserted that senior party leader L K Advani's yatra would go through the state regardless. The motive of the yatra did not seem to be only anti-corruption,that the 84-year old leader  is still driven by the ambition to become Prime Minister seems to be the main factor.Modi's fast for communal harmony,was critisized too it was like the devil quoting scriptures after having presided over the worst communal pogrom in independent India."


 It was ironical that Yeddyurappa was facing arrest and his party was taking out a yatra on the issue of corruption.












Friday, October 14, 2011

Justice :Social

Definition of justice is "giving to each what he or she is due." But the problem is knowing what is "due".
Well,"justice" is a set of universal principles which guide people in judging what is right and what is wrong, no matter what culture and society they live in.


Social justice is the virtue which guides us in creating those organized human interactions we call institutions. In turn, social institutions, when justly organized, provide us with access to what is good for the person, both individually and in our associations with others. Social justice also imposes on each of us a personal responsibility to work with others to design and continually perfect our institutions as tools for personal and social development.


 In essence, social justice is concerned with equal justice, not just in the courts, but in all aspects of society. This concept demands that people have equal rights and opportunities; everyone, from the poorest person on the margins of society to the wealthiest deserves an even playing field.