Monday, September 4, 2017

Interaction

can't the rural Indian be made aware not to cast his/her vote on the basis of caste but as a farmer?
First i will ask you two questions
Q-1 If you are an atheist how difficult it is for anyone to convince you that god exist?
Q-2 if you are a theist how difficult it is for anyone to convince you that god does not exist?
Now to your question
What i beleive is once a person reach a certain age it is extremely difficult to change his/her viewpoint especially when they are not educated(here i am not referring to graduate or highschool degree but the education which opens up your mind and give you the ability to raise questions) do you think that kind of education is provided in rural areas. To make the ruler people aware we first need to connect with them in a way that both sides of the coin is presented in front of them i.e., the consequence of voting an incapable person from their caste/community instead of capable person of different caste/community which is impossible because i have tried convincing people and what i have learned from that is “you can Never win an argument with two type of people one who has more knowledge than you and the other one who is an idiot".
P.S-i do not know the translation for above sentence in english

Friday, March 6, 2015

होली है ~

दिलों में प्यार लिए आज आयी होली
मस्ती चहुं और आज लायी होली
.
रंगों में उमंग उमंग में है रंग
लाल गुलाल जैसे रंगों से रंगे
करके बदरंग आज लुभाये होली
.
सूना सूना अंगना बिन फूलों के जैसे
अधूरी है होली बिन मस्ती के वैसे
रंगों की बहार ले कर आयी होली
.
गुलाबों का मौसम बगिया बहार पे
कूकती कोयल अंबुआ की डाल पे
है हर्षोल्लास आज लायी होली
.
दिलों में प्यार लिए आज आयी होली
मस्ती चहुं और आज लायी होली



Wednesday, March 4, 2015

अपने होठों पर सजाना चाहता हूँ



अपने होठों पर सजाना चाहता हूँ,
आ तुझे मैं गुनगुनाना चाहता हूँ।

कोई आंसू तेरे दामन पर गिराकर,
बूँद को मोती बनाना चाहता हूँ।

थक गया में करते-करते याद तुझको,
अब तुझे मैं याद आना चाहता हूँ।

छा रहा है सारी बस्ती में अँधेरा,
रौशनी को घर जलाना चाहता हूँ।

आखिरी हिचकी तेरे ज़ानों पे आये,
मौत भी में शायराना चाहता हूँ।



Wednesday, April 23, 2014

हरी ॐ तत्सत


हरि ओम तत्सत ,हरि ओम,
महामन्त्र है ,इसको जपाकर ।
वो है कौन सा मन्त्र कल्याणकारी,
तो बोले त्रिलोचन महादेव
हरि ओम ततसत हरि ओम


असुर ने जो अग्नि का अम्बा रचा था,
तो निर्दोश प्रह्लाद क्यों कर बचा था ,
यही मन्त्र लिखे थे उसकी ज़ुबाँ पर
हरि ओम ततसत हरि ओम

लगी आग लंका में हलचल मचा था,
तो घर विभीषण का क्यों कर बचा था,
यही शब्द लिखे थे उसके मकाँ पर,
हर ओम ततसत हरि ओम

Monday, February 17, 2014

परिवर्तन की आग

आज देश नए दौर की और अग्रसर लगता है नई नीतिया नए नारे नया जोश नई सोच
बराबरी शिक्षा भरपेट भोजन इन्साफ रोजगार और भ्रस्टाचार से मुक्ति का ताना बाना दिखाई देनेलगा है लोग जस्बा और हिम्मत दिखा रहे है एक जुट हो सडको पे निकल रहे है अपना हक मागते छीनते नज़र आने लगे है

शुरुआत हो चुकी है और सभी को समझ आ गया की योगदान जरुरी है कोई भी यदि आज इस क्रांति से अछुता रहा तो आनेवाली पीढ़ी के समक्ष उसे नीचे देखना पड़ेगा

आज राजनेता का मूलमन्त्र जिसने की शर्म उसके फूटे कर्म हो चुकी थी नेता जी आम मतदाता की पहुच से दूर होने लगा था महिलाओ का आयेदिन शोषण मीडिया का हावी होना आक्रोशित जनता सडको चोराहो पे निकल पड़ी इसी का नतीजा है की आज तीसरा विकल्प उठ खड़ा हुआ आम आदमी पार्टी के रूप में और त्रस्त जनता जुट गई उसके साथ झाड़ू ले के भ्रस्टाचार हटाने

आज आम इंसान को सिर्फ साफ सुथरी व्यावस्था चाहिए उसका काम समय पे और सही चाहिए चक्कर काटने का समय नहीं है एक आम इंसान के पास बाबुओ के । सभी प्रत्याशी समझ गए या समझने का ढोंग कर रहे है की सुशाशन सादगी और कर्म निष्ट ता से ही आएगा  तरक्की हो परन्तु भ्रस्टाचार जड़ से समाप्त हो

लोगो को खुद आगे बढ़ के हिसाब मांगना है और सुनिश्चित करना है की शाशन सु साशन है  नेता आम इन्सान का सेवक है ये उसे याद रखना होगा अन्यथा हिसाब लिया जायेगा 

Saturday, February 15, 2014

Turbulence

Very good morning and great weekend ahead ! Transformation in climate is very well felt with chilling cold wave and showers .weddings as well as Valentine got a twist of shower as addon.

Everyone was in a great mood and suddenly as the eve approaches uncertainty knocks the door of democracy .The much awaited turbulance and fumble rumbles began at the capital state assembly.

Our hero resigns just 40 days after the ramlila swerning in ceremony .People got shocked divastating what about the change in system and the trust shown in that new educated leader ?

Is it his new stratagy ,is he planning something much bigger is the leader of the masses trying to come with a clear mandate so as to work freely in favour of the countrymen .Time will tell us surely

Everyone started the blame game .



Thursday, February 13, 2014

छिछोरा सदन

चोसठ  वर्षो में जो न हुआ वो आज हुआ । चोसथ वर्ष पहले न नेहरु न पटेल और न आंबेडकर ने सोचा होगा की लोकतंत्र के मंदिर में ऐसा होगा !

माँर्यादा पुर्शोतम श्री राम के देश के एक पुरुष सांसद ने संसद भवन में महिलाओ और पुरुष सांसदों पे पीसी हुई कली मिर्च का छिडकाव कर सभी मर्यादाओ को तार तार किया ।संसद के कार्य में बाधा पहुचाई संसद में तोड़ फोड़ और कोहराम मचा हुआ था ।

जिन सांसदों के पल पल के लिए जनता मेहनत मजूरी कर टैक्स देती है और उसी टैक्स का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ सांसदों के आराम और सुविधाओ पे खर्च होता है उन्हें कुश्ती करते माइक तोड़ते और संसद में हुर्दंग करने पे जनता माफ़ न करेगी

एक तरफ आम आदमी को सड़क पे गलत तरीके से गाडी चलने पे जेल भेज दिया जाता है वाही दूसरी और संसद में तोड़ फोड़ करने पे सांसदों को सिर्फ पाच दिन के लिए घर भेज गया क्यों न इनकी सदस्यता भंग कर दी जाए

सुना है सांसद आम आदमी के नुमाइन्दे है तो फिर ऐसे गैरानुशाशामक नुमैन्दो पे जनता की गाडी कमी क्यों खर्च हो ।कल भी यदि किसी को याद हो तो प्रधान मंत्री जी ने कहा था की आज सदन के लिए शर्मनाक दिन है फिर भी आज ऐसा हुआ

लोकतंत्र के रक्षक ही भक्षक बन बैठे क्यों न जनता को इन्हें नैतिकता का पाठ पढ़ना चाहिए